नागपंचमी कब है? नागपंचमी क्या है? हम नागपंचमी क्यों मनाते है|

Naag panchami

Written by indiancrook

July 10, 2020

दोस्तों आपका स्वागत है IndianCrook.com के कल्चर एंड फेस्टिवल्स सेक्शन में! आज हम जानेंगे नागपंचमी इस उत्सव के बारे में, के क्यों मनाया जाता है यह उत्सव, क्या विशेषताए है इस उत्सव की, इसके पीछे का इतिहास क्या है आदि|

नागपंचमी एक हिन्दू उत्सव है, जिसमे नागदेवता की को पूजा जाता है |  शिवजी की पूजा अर्चना की जाती है | यह दिन भारत तथा अन्य हिन्दू राष्ट्रों में भी मनाया जाता है | इस उत्सव को हमारे पडोसी देश नेपाल में भी बड़े ही भक्ति भाव से मनाया जाता है | हिन्दू जहा भी रहते है वे हमारे ट्रडिशन्स को भूले बिना यह दिन सेलेब्रट करते है | 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, श्रावण मास (जो की जुलाई / अगस्त के दरमियान आता है) के महीने के पांचवें दिन पूजा की जाती है। कुछ भारतीय राज्य, जैसे कि राजस्थान, गुजरात, उसी महीने के कृष्ण पक्ष पर नाग पंचमी मनाते हैं। उत्सव के हिस्से के रूप में, चांदी, पत्थर, लकड़ी या साँपों की पेंटिंग से बने एक नाग या नाग देवता को दूध से स्नान कराया जाता है और परिवार के कल्याण के लिए उनका आशीर्वाद मांगा जाता है।

आखिर क्यों मनाया जाता है नागपंचमी का त्यौहार?

 महाभारत महाकाव्य में, राजा जनमेजय के नागों (सरप्रा सात) के बलिदान को रोकने के लिए ऋषि अस्तिका की खोज, अच्छी तरह से ज्ञात है, क्योंकि इस बलिदान के दौरान महाभारत को ऋषि, वैशम्पायन द्वारा सर्वप्रथम सुनाया गया था। साँपों के राजा तक्षक के घातक काटने के कारण अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए नागों की दौड़ को हराने के लिए जनमेजय द्वारा यह यज्ञ किया गया था। जिस दिन अस्तेय के हस्तक्षेप के कारण यज्ञ को रोका गया, वह श्रावण मास में शुक्ल पक्ष पंचमी के दिन था।

उस दिन को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है।

भारतीय शास्त्र जैसे अग्नि पुराण, स्कंद पुराण, नारद पुराण और महाभारत में सांपों की पूजा करने का विवरण मिलता है| महाभारत महाकाव्य में, कुरु वंश के राजा परीक्षित के पुत्र, जनमेजय, तक्षक नामक सर्प राजा द्वारा सर्प दंश से अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए, सर्प सात्र नामक सर्प यज्ञ कर रहे थे। इस यज्ञ को विशेष रूप से सेट किया गया था| और दुनिया के सभी साँपों को मारने के लिए अग्नि यज्ञ की शुरुआत कर दी गयी|

जनमेजय की मौजूदगी में किया गया बलिदान इतना शक्तिशाली था कि इससे सभी सांप यज्ञ कुंड (बलि अग्नि कुंड) में गिरने लगे|  जब पुजारियों ने पाया कि तक्ष्का खुद को बचने के लिए इंद्रा लोक की और भाग गया तब उसे वापस लाने के लिए, ऋषियों ने मंत्रों का पाठ करने का तरीका बढ़ा दिया| तक्षक ने इंद्र की खाट के चारों ओर खुद को जमा लिया था, लेकिन यज्ञ का बल इतना शक्तिशाली था कि तक्षक के साथ इंद्र भी आग की ओर खिंच गए|

इस कारन सभी देवता बहुत ही ज्यादा डर गए| उन्होंने तब मनसादेवीजी से हस्तक्षेप करने और संकट हल करने की बिनती की|  फिर उन्होंने अपने पुत्र अस्तिका से अनुरोध किया कि वह यज्ञ स्थल पर जाए और जनमेजय से सरप्रात्र यज्ञ को रोकने की बिनती करे|

अस्तिका ने अपने शास्त्रों और ग्रंथो के नॉलेज से राजा जन्मेजय का दिल जित लिया| इस बात पर खुश होकर राजा ने उसे एक वरदान दे दिया| इसके बाद अस्तिका ने राजा से रिक्वेस्ट की के कृपया यह यज्ञ रोक दीजिये, इससे बेजान सांप भी मारे जा रहे है| राजा जन्मेजय ने ऋषियों को किये गए वादे से कभी बैक आउट नहीं किया था, इसलिए अपने शब्द को रखने के लिए उसने यज्ञ रोक दिया|

फिर यज्ञ को रोक दिया गया और इस तरह इंद्र, तक्षक और उनकी अन्य नाग जाति के जीवन को बचा लिया गया| यह दिन, हिंदू कैलेंडर के अनुसार, नादिवर्धिनी पंचमी मानसून के मौसम के दौरान श्रावण) महीने में आता हैं | और तबसे इस दिन को नागपंचमी के नाम से जाना और मनाया जाने लगा|

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